समंदर

वो कहती है,
उसे समंदर बहुत पसंद है
कभी तूफ़ानी कभी सुकूनी
कई राज़ छिपे हैं इसमें
लहरें आकर चली तो जाती हैं
पर छोड़ जाती हैं एक नमी
मानो किसी सुहाने सपनों के बाद
चेहरे पे एक गीली मुस्कान
जितना भी देखो इसे
जी ही नहीं भरता
और तिलिस्म खुलते जाते हैं

सुनो जानां,
मुझे भी समंदर बहुत पसंद है
और पता है
मेरे और तुम्हारे समंदर का
रंग एक ही है …

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