सुनो !
मैं तुम्हें पूरा नहीं जानना चाहता
डर लगता है कि अगर जान गया तो
वो excitement, वो ललक कहीं गुम हो जाएगी
कहीं ना कहीं एक novelty factor होना चाहिए जो
हमारे रिश्ते का ईंधन हो
आज तुम्हें पूरा ढूँढ लिया तो कल क्या खोजूँगा
बताओ !
मैं नहीं जानता
तुम्हारे काजल के पीछे कितना सूनापन छिपा है
तुम्हारे चेहरे के पीछे कितना सन्नाटा पसरा है
तुम्हारी खिलखिलाहट ज़हन के किस दर्द को छुपाने के लिए है
तुम जब LOL भेजती हो तो क्या सच में इतना हँसती हो
मैं नहीं जानता कि
तुम कानों में दो-दो बालियाँ क्यों पहनती हो
पाँव में काला धागा क्यों बाँधती हो
बाल खुले रखने से क्यों घबराती हो
मैं नहीं जानता
तुम्हारे बदन पे कितने तिल हैं
तुम्हें गुदगुदी कहाँ कहाँ होती है
होती है भी या नहीं
जैसे छोटे बच्चे धीरे-धीरे बचा-बचा के चॉकलेट खाते हैं न
ताकि जल्दी ना खत्म हो जाए
मैं भी चाहता हूँ कि
तुम धीरे-धीरे पिघलो मेरे ज़बां पे
ताकि देर तलक ज़ायका रहे तुम्हारा
हाँ, मैं तुम्हें पूरा नहीं जानना चाहता
मैं चाहता हूँ कि कुछ बाकी रह जाए हमारे दरमियाँ …